Tuesday, 20 February, 2018
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करियर

जीवन में मिठास लाएं न्यूट्रीशनिस्ट

Posted at: Feb 12 2018 5:37PM
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समय तेजी से करवट ले रहा है तथा लोगों के जीवन में जटिलताएं भी निरंतर बढ़ती जा रही हैं। परेशानी एवं जटिलता भरे इस माहौल में भी लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति तथा अपने खान-पान एवं परहेज संबंधित समस्याओं को लेकर जागरूक हैं तथा इनके समाधान के लिए आतुर रहते हैं। उनकी तमाम समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान करते हैं न्यूट्रीशनिस्ट। एक सामान्य जीवन व्यतीत करने वाले नागरिक से लेकर खिलाड़ियों के लिए जरूरी फूड सप्लिमेंट तक का उपाय इन्हीं न्यूट्रीशनिस्टों के जरिए होता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि न्यूट्रीशन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए फूड एवं अन्य पदार्थो को नियंत्रित करने का विज्ञान है। 
आज यह अपनी उपयोगिता के चलते नये प्रोफेशन का रूप अख्तियार कर चुका है। एक न्यूट्रीशनिस्ट का काम जीवन के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए खान-पान के तौर-तरीकों तथा अच्छे स्वास्थ्य के मद्देनजर जरूरी चीजों को बढ़ावा देना होता है। न्यूट्रीशनिस्ट अपने ज्ञान एवं शोधों के द्वारा खाद्य पदार्थों की सूची तैयार करता है तथा उस आधार पर उसे हॉस्पिटल, फिजिकल ट्रेनिंग कैंप, पर्वतारोहियों आदि के लिए निर्धारित करता है। न्यूट्रीशन के फील्ड में जो भी करियर आॅप्शन हैं, वे ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट बनने के बाद ही सामने आते हैं।
 इसके लिए लोगों को होम साइंस, न्यूट्रीशन, फूड साइंस/ टेक्नोलॉजी से सबंधित कोर्स करने अनिवार्य हैं। बैचलर कोर्स (न्यूट्रीशन एवं डायटीशियन) के लिए छात्र को विज्ञान विषयों (फिजिक्स, कैमिस्ट्री, होम साइंस एवं बायोलॉजी) में पास होना अनिवार्य है। तभी बीएससी इन होम साइंस तथा अन्य बैचलर प्रोग्राम जैसे फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मेडिसिन, होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी से संबंधित अन्य विषयों को भी शामिल किया जाता है। 
कुछ ऐसे भी संस्थान हैं जो 10+2 के पश्चात चार वर्षीय फूड टेक्नोलॉजी कोर्स कराते हैं, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट लेवल पर न्यूट्रीशन का डायटीशियन से संबंधित कोर्स या तो दो वर्ष का है या फिर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (1 वर्षीय) के रूप में है। पीजी तथा पीजी डिप्लोमा कोर्स करने के लिए फूड साइंस, होम साइंस, होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी, बायो कैमिस्ट्री तथा मेडिसिन में बैचलर होना आवश्यक है। एमएससी इन होम साइंस भी इसी स्तर पर किया जाता है। 
प्रमुख कोर्सों की रूपरेखा
- एमएससी इन न्यूट्रीशन- 2 वर्षीय पाठ्यक्रम
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डायटेटिक्स एंड पब्लिक हैल्थ न्यूट्रीशन-एक वर्ष का कोर्स व 3 माह की इंटर्नशिप
- पीएचडी इन फूड एंड न्यूट्रीशन- न्यूनतम 3 साल
- सर्टिफिकेट कोर्स इन फूड, न्यूट्रीशन एंड चाइल्ड केयर- छह माह
- डिप्लोमा इन न्यूट्रीशन एंड हैल्थ एजुकेशन-छह माह
- बीएससी इन न्यूट्रीशन एंड डायटेक्टिस
- एमएससी इन अप्लाइड न्यूट्रीशन
- पीएचडी इन न्यूट्रीशन
खान-पान में अभिरुचि जरूरी
एक अच्छे न्यूट्रीशनिस्ट की रुचि खानपान एवं उसे तैयार करने में अवश्य होनी चाहिए। तभी वह इस फील्ड की बारीकियों को समझ पाएगा। समूह में अथवा व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को अपने बोलने की कला से बांधे रखने (कम्युनिकेशन स्किल्स), विभिन्न रिपोर्ट तैयार करने का कौशल तथा पोस्टर, बैनर लिखने संबंधी ज्ञान भी कदम-दर-कदम काम आता है। उनकी वाणी में मिठास हो तथा मरीज के साथ दोस्ताना व्यवहार बनाने की कला जानते हों। किसी भी संगठन के लिए प्लानिंग एवं इनके प्रशासनिक कार्यो को संभालने के साथ ही शारीरिक रूप से फिट तथा एक टीम लीडर की भांति काम करने का जज्बा सफलता का पैमाना तय कर सकता है।