Saturday, 25 May, 2019
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एक्सक्लूसिव खबर

स्वच्छता में देश का नंबर वन शहर इसलिए है हमारा इंदौर

Posted at: Mar 3 2019 4:24PM
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- केपी सिंह
इंदौर। शहर के 6 लाख मकान, दुकान और ऑफिस में गीला-सूखा कचरा अलग-अलग उठ रहा हो। जहां शहरवासियों की स्वच्छता से संबंधित शिकायतों का समाधान 24 घंटे के भीतर हो जाता हो। जहां होटल, रेस्टोरेंट, घरों में गीले कचरे से बन रही खाद। शहर को हरा-भरा बनाने के साथ ही सौंदर्यीकरण कर खूबसूरत पेंटिंग बनाई गई हो या स्लम बस्तियों का ब्यूटिफिकेशन किया गया हो। ऐसा साफ सुथरा है हमारा इंदौर। रास्ते पर कोई कचरा फेंकता है तो उसे तत्काल टोक देते है। निगम के अधिकारियों से लेकर सफाई मित्रों ने दिन-रात काम किया है, जिसका रिजल्ट है कि हम देश में सबसे अलग है। 
देश के नंबर वन शहर का तीसरी बार भी इंदौर इसलिए हकदार है, क्योंकि कुछ मॉडल सिर्फ इंदौर में ही लागू किए गए है। सफाई के इन मॉडल तक दूसरा कोई शहर भी नहीं पहुंच पाया है। इसीलिए यह सबसे अलग इंदौर को कर रहे है और हैट्रिक लगाने के लिए बड़ा दावेदार बनकर उभरा है। खास बात यह है कि दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार भी इंदौर को कई अवॉर्ड मिल रहे है, जो इंदौर को अलग बना रहे है। 
सफाई में निगम कमिश्नर आशीष सिंह की प्लानिंग और एडीशनल कमिश्नर रोहन सक्सेना के अनुभव ने इंदौर को तीसरी बार ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इसमें कमिश्नर नए थे, जबकि सक्सेना को तीन साल का अनुभव था, जिसका लाभ लिया और इंदौर को स्वच्छता की रेस में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया। इसीलिए अतिरिक्त अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा ने को-ऑर्डिनेशन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। इनके द्वारा फील्ड और ऑफिस की कमान संभाल रखी थी, जो सफाई के मापदंडों की बेहतर प्लानिंग करने में कामयाब रहे। 
फिर बात डॉक्युमेंटेशन की करें या मैदान की। इसी तरह शहर को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने में डिप्टी कमिश्नर कैलाश जोशी का रोल महत्वपूर्ण रहा, जबकि सिटी इंजीनियर रहते अशोक राठौर और अनूप गोयल ने स्लम में ब्यूटिफिकेशन का काम कर शहर को नई सौगात दी। इसी तरह कंसल्टेंट असद वारसी परदे के पीछे प्लानर बने और नई-नई तकनीक शहर में लेकर आए, जहां दूसरा शहर पहुंचने की सोच भी नहीं सकता था। 
देशभर के शहरों में इंदौर ने किया अनोखा काम
नंबर वन - गीले कचरे को डीसेंट्रलाइज्ड ट्रीटमेंट करने का काम देश में इंदौर में किया गया है। होटल, रेस्टोरेंट, चोइथराम मंडी, घरों की कम्पोस्टिंग कर बनाया गया है, जिसे देशभर का कोई भी शहर नहीं कर पाया। शहर में गीले कचरे से खाद बनाने में सफलता मिली। 
नंबर दो - ट्रेंचिंग ग्राउंड में सालों पुराने कचरे के पहाड़ों को खत्म कर खूबसूरत गार्डन तैयार किया जा रहा है, जो देश में सबसे अलग और यूनिक है। इसी के बदौलत सेवन स्टार रेटिंग के लिए अप्लाय करने में भी कामयाब रहे। 
नंबर तीन - प्लास्टिक से डीजल बनाने का काम पायलेट प्रोजेक्ट के तहत कर रहे है। शुरुआत में आठ टन प्लास्टिक से करीब 2500 से 3 हजार लीटर डीजल तैयार कर रहे है, जो यूनिक है। 
नंबर चार - बोहरा समाज और जत्रा वाला कार्यक्रम भी जीरो वेस्ट रहा। यहां लोगों ने आगे आकर इच्छा जताई और जीरो वेस्ट इवेंट कर दिया, जिसमें थ्री आर को पूरी तरह से फॉलो किया गया। ये भी देश के किसी भी शहर में नहीं किया गया है।
नंबर पांच - शहर में दौड़ रही करीब 700 से ज्यादा वाहनों की मॉनिटरिंग जीसीपी के माध्यम से एक ही स्थान पर। 19 जोन की 19 स्क्रीन पालिका प्लाजा में लगी हुई है, जिसमें गाड़ियों के सुबह 6 बजे से निकलने से लेकर रात 12 बजे तक की लोकेशन लाइव कंट्रोल रूप पर दिखाई देती है। 
यहां भी है हम सबसे आगे
- किसी भी सार्वजनिक, व्यावसायिक एवं आवासीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का कचरा न हो, इसलिए दिन में तीन बार लीटरबिन की सफाई। 
- शहर में उत्पन्न 100 फीसदी कचरे का वैज्ञानिक निपटान। 
- शहर में सभी नाले, नालियां, नदी, तालाब, झील, जलाशय आदि में किसी भी प्रकार का कचरा न हो, इसलिए जालियां लगाकर कवर कर दिया गया। 
- सभी पुराने कचरा डंपिंग, ग्राउंड आदि का वैज्ञानिक निपटान। 
- 100 फीसदी डोर-टू-डोर कलेक्शन। 
- 100 प्रतिशत गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लिया जा रहा है। 
- 100 प्रतिशत बिन फ्री शहर। देश में सिर्फ इंदौर ही है, जहां बड़े-बड़े कचरे के कंटेनर नहीं रखे गए।
- थ्री आर परिपालन में निरंतर कचरे के उत्पादन में कमी। 
- ओडीएफ प्लस-प्लस का सर्टिफिकेट लेने वाला शहरों में शुमार। 
- ट्रांसफर स्टेशन का मैनेजमेंट 100 प्रतिशत। 
- व्यापारी संगठन द्वारा सहयोग दिया गया है, जिसमें डिस्पोजल फ्री मार्केट छप्पन, सराफा और मेघदूत के सामने। 
- शहर में खूबसूरत पेंटिंग और म्यूरल बनाकर देश के सबसे सुंदर शहर का ताज। 
- इथराम और कबीटखेड़ी में गैस प्लांट से बसों का संचालन। 
स्वच्छता सर्वेक्षण का इतिहास
- 2015-16- 73 शहरों में हुए सर्वे में इंदौर सहित प्रमुख शहर ही टॉप 10 में जगह नहीं बना पाया था। इसमें इंदौर 25वें स्थान पर आया था। 
- 2016-17- 434 शहरों में सर्वे किया गया, जिसमें इंदौर नगर निगम नंबर वन स्थान पर रहा। 
- 2017-18- 4203 शहरों में सर्वे किया गया, जिसमें इंदौर ने दूसरी बार नंबर वन स्थान हासिल किया। 
- 2018-19- देशभर के सारे शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण स्पर्धा में शामिल हुए, जिसमें पांच हजार अंकों को हासिल करने के लिए दौड़ शुरू की गई। इस दौड़ में भी इंदौर सबसे आगे निकल गया। 
पूरी उम्मीद है, लगाएंगे हैट्रिक
इंदौर को नंबर वन बनाने के लिए पूरी टीम ने दिन-रात मेहनत की है, जिसके चलते हमें तीन अवॉर्ड मिल रहे है। मुझे पूरी उम्मीद है कि हम तीसरी बार भी हैट्रिक लगाएंगे। 
आशीष सिंह, कमिश्नर, नगर निगम