Thursday, 05 December, 2019
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स्तन हटाए बिना लेजर से कैंसर का कारगर इलाज

Posted at: Nov 21 2019 12:55PM
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नई दिल्ली। देश में महिलाओं की मौत के सबसे बड़े कारण स्तन कैंसर  से जंग में लेजर तकनीक काफी कारगर सिद्ध हो रही है। कैंसर सर्जरी के कुल मामलों में 80 प्रतिशत मुख तथा स्तन कैंसर के हैं ऐसे में इस नयी तकनीक को सभी के लिए सुलभ बनाने की सख्त जरूरत है। देश में स्तन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने अपनी रिपोर्ट में अगले साल तक इस कैंसर के 17.3 लाख नये मामले सामने आने की आशंका  जतायी है जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की जान को जोखिम है।
रोगी की जान बचाने के लिए स्तन हटाकर अलग कर दिया जाता है और मुख की सर्जरी में रोगी का चेहरा वीभत्स हो जाता है। ऐसे लेजर तकनीक बड़ी आशा के किरण के रुप में सामने आई है। इन मामलों में परेशानियों से काफी निजात मिली है और सफलता का ग्राफ भी काफी अच्छा है। मुंबई के ऑर्चिड कैंसर ट्रस्ट के संस्थापक डॉ (सर्जन) रूसी भल्ला ने आठ साल पहले  लेजर से मुख के कैंसर का इलाज शुरु किया। इस  तरह के कैंसर के इलाज के लिए यह अंतरराष्ट्रीय तकनीक है जिसकी डॉ भल्ला  ने देश में शुरुआत की।
इसकी सफलता से उत्साहित डॉ भल्ला ने स्तन कैंसर से भी जंग के लिए इस तकनीक को हथियार बनाया। उन्होंने ‘यूनीवार्ता’ से  कहा,‘‘हमने मुख और स्तन के कई रोगियों का लेजर तकनीक से इलाज किया है और  पारम्परिक सर्जरी की तुलना में सस्ती इस सर्जरी का नतीजा आर्श्चयजनक रहा  है।’’ डॉ भल्ला ने कहा,‘‘इस तकनीक से मुख्य के कैंसर के रोगियों को जीवन की गुणवत्ता के साथ अच्छी उम्र भी मिली है। स्तन कैंसर में जहां महिलाओं को स्तन हटाने की पीड़ा और हीन भावना से गुजराना पड़ता है,ऐसे कैंसर के तीसरे चरण में भी लेजर सर्जरी से बिना किसी चीर-फाड़ और बाहरी दाग-धब्बे का इलाज संभव हुआ है।
इलाज के छह-सात साल के बाद एमआरआई रिपोर्ट में कैंसर का नामोनिशां नहीं पाया  गया है। लेजर तकनीक से इस तरह के कैंसर के इलाज में रोगियों को किस तरह की  राहत मिली है, इसके प्रमाण के लिए हमारे पास ऐसे कई रोगियों की मेडिकल  रिपोर्ट हैं। कैंसर पर फतह करने वाले लोगों ने अपनी त्रासदी और उससे राहत के अपने सफर की दास्तां को प्रमाण के रुप में वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है।
उन्होंने कहा कि  लेजर तकनीक  से वर्तमान में होने वाली मुख और स्तन सर्जरी  की जटिल प्रक्रिया से बचा जा  सकता है। मुख कैंसर के रोगियों को लेजर तकनीकी  से इलाज के दौरान मुंह के  निचले अथवा किसी हिस्से को काटने की जरुरत नहीं  पड़ती और ना ही बाद में  उन्हें पाइप के सहारे पेय पदार्थ देना पड़ता है।  ऐसा भी नहीं होता कि वे  अपनीआवाज खो बैठते हैं।