Wednesday, 12 December, 2018
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यात्रा

दिल्ली की इन इमारतों को देखना ना भूलें

Posted at: Feb 12 2018 4:51PM
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दुनिया में मुगलों का इतिहास अपने आप में अनोखा है, भारत में मुगलों ने अपने शासन के वक्त कुछ भव्य इमारतों का निर्माण करवाया। सभी महलों की अपने आप में एक अलग कहानी है। एक महल तो ऐसा है कि अगर उस महल के प्रतिबिंब को तालाब में देखें तो वह एक पानी के जहाज जैसा लगता है। ऐसे ही कुछ इमारतों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जहां जाकर आप इनका लुत्फ भी ले सकती हैं, साथ ही साथ इतिहास को भी जान सकती हैं।
जहाज महल
दिल्‍ली के महरौली में स्‍थित 'जहाज महल' वाकई अद्भुत है। यह हौज ए शम्‍सी वाटर टैंक के कोने में स्‍थित है। इसको जहाज महल इसलिए कहते हैं क्‍योंकि बगल झील में महल का प्रतिबिंब देखने पर बिल्‍कुल पानी वाले जहाज जैसी आकृति बनती है।
इसका निर्माण लोदी राजवंश के काल में खुशी के पल बिताने की धर्मशाला के रूप में किया गया था। आज भी यहां पर्यटकों की भारी भीड़ जुटती है।
जफर महल
यह मुगल काल में बनी सबसे आखिरी ऐतिहासिक इमारत है। वैसे तो इस महल का निर्माण अकबर शाह द्वितीय द्वारा करवाया गया था लेकिन बाद में 19वीं शताब्‍दी में बहादुरशाह जफर ने महल के मुख्‍य दरवाजे का निर्माण करवाया इसलिए इसे जफर महल नाम दिया गया।
साउथ दिल्‍ली में स्थित इस ऐतिहासिक इमारत को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
तुगलकाबाद
मंगोलों के आक्रमण से बचने के लिए दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलकाबाद में किला बनवाया था।
यह किला तुगलक को कभी फला नहीं। वह यहां से कभी शासन नहीं कर सका। आज खाली पड़े इस किले को देखने पर्यटक आते हैं और इतिहास को समझते हैं।

विजय मंडल या जहांपनाह
तुगलक वंश का सबसे चर्चित सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक अपने पिता गयासुद्दीन तुगलक की हत्या करके गद्दी पर बैठा। इसी खूनी कुकृत्य के कारण वह अपने पिता के किले तुगलकाबाद में शांति से नहीं रह सका। मुहम्मद तुगलक ने वहां रहने वाले वाली जनता को संरक्षण देने के हिसाब से दिल्ली के चौथे नगर को बसाया।
यह नगर काफी हद तक किला राय पिथौरा और सीरी के बीच एक दीवारनुमा अहाता था। इस शहर का नाम रखा गया, जहांपनाह यानी पूरी दुनिया की पनाहगाह। जहांपनाह की दीवारें आज भी वहां खड़ी हैं जर्जर हो चुके इस अहाते को देखने भारी संख्‍या में लोग आते हैं। जिन्‍हें इतिहास में रुचि है वह इस जगह को काफी समझते होंगे।
कुतुबमीनार
दक्षिण दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुबमीनार ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊंची मीनार है।
इसकी ऊंचाई 72.5 मीटर करीब 237 फुट और व्यास 14.3 मीटर है, जो ऊपर जाकर शिखर पर 2.75 मीटर लगभग 9 फुट हो जाता है। इसमें 379 सीढियां हैं। कुतुबमीनार एक मशहूर टूरिस्‍ट स्‍पौट है जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।