Friday, 23 April, 2021
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हरियाणा में अनेक घरों को रोशन कर रहीं परदेसी बहुओं को सम्मान दिलाने के लिये अभियान

Posted at: Nov 28 2019 12:49AM
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जींद। हरियाणा में बिगड़े लिंगानुपात के कारण दूसरे प्रदेशों से लाई जाने वाली महिलाओं को भले ही मोल की या भगोड़ी बहुएं करार दिया गया हो लेकिन इनका राज्य में अनेक परिवारों की वंश वृद्धि में बेहद अहम योगदान रहा है। दूसरे प्रदेशों से लाई गई हजारों बहुएं राज्य में अनेकों घर बसा रही हैं। सामाजिक संस्था सेल्फी विद डॉटर फाऊंडेशन के के एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि राज्य में लगभग 1.30 लाख बहुएं दूसरे प्रदेशों से लाई गई हैं। फाउंडेशन द्वारा दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के कई विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के सहयोग से किये गये सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि ये महिलाएं संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा अलग होने के बावजूद करीब डेढ़ लाख परिवारों का घर रोशन कर रही हैं।
 
संस्था का कहना है कि ऐसी प्ररदेसी बहुएं अपमान नहीं सम्मान की हकदार है। दूसरे प्रदेशों से लाई जाने वाली बहुओं को सम्मान दिलाने के लिए फाउंडेशन ने परदेसी बहु-म्हारी शान अभियान शुरू किया है ताकि इन पर से मोल की या भगोड़ी बहुओं का कलंक हटाया जा सके। फाऊंडेशन द्वारा जुलाई 2017 से जुलाई 2019 तक कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार जब से हरियाणा बना है तब से अब तक करीब 1.30 लाख बहुएं दूसरे प्रदेशों से लाई गई जिन्हें मोल की बहुएं कहा जाता है। इस सर्वेक्षण में दिल्ली के लेडी इरविन और ंिहदू कालेज, हरियाणा के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय तथा पंजाब स्थित विश्वधिालयों के करीब 125 छात्र-छात्राएं शामिल रहे। इन विद्यार्थियों ने बाकायदा प्रोजेक्ट बनाकर इस पर काम किया। इसके अलावा फाउंडेशन ने सोशल मिडिया पर ‘मिशन पॉसिबल अभियान‘ चलाकर राज्य के हर जिले से इन बहुओं की जानकारी जुटाई। सर्वेक्षण के अनुसार हरियाणा में गुरुग्राम और रेवाड़ी क्षेत्रों में दूसरे प्रदेशों से बहुएं लाई जाने लगी थीं। रोहतक, जींद,  सोनीपत, हिसार, कैथल, झज्जर, यमुनानगर, कुरूक्षेत्र में मोल की लाई गई बहुओं का प्रतिशत दक्षिण हरियाणा के बाद आता है।
 
शुरूआत में बंगाल से बहुएं लाई जाती थीं लेकिन अब बिहार, उतर प्रदेश, पूर्वोत्तर के असम, मध्य प्रदेश, उतर प्रदेश और उतराखंड से भी बहुएं लाई जाने लगी हैं। गत तीन साल के दौरान पंजाब से भी बहुएं लाई जाने लगी हैं। मेवात में भी गत एक दशक में मोल की बहु का प्रतिशत अब बढ़ रहा है। सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि जाट, यादव और  ब्राह्मण समुदाय में इनकी संख्या ज्‍यादा है। हरियाणा से मोल की बहु अब लुटेरी बहु के रूप में भी जाने लगी। गत करीब नौ साल में ऐसी बहुओं के कीमती सामान लेकर फरार होने के मामले बढ़े हैं। सर्वेक्षण में सामने आया है कि करीब 1470 महिलाएं खरीद कर लाने के बाद या तो खुद अपने घर वापिस जा चुकी हैं या घर से कीमती सामान लेकर फरार हो चुकी हैं। इनमें जो नाबालिग लड़कियां खरीद कर बहु बनाई गईं उनके अभिभावकों ने इनसे शादी अपने लड़कों के खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं। ऐसे मामलों में उन्हें वापिस उनके घर भेजने के साथ दोबारा से उनके अभिभावकों को पैसे देने पड़े। राज्य में अपनी इज्जत और सम्मान की खातिर बहुत की कम लोगों ने लूट या धोखा देकर फरार हुई बहुओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं।
 
अधिकतर से मामले को दबाना की उचित समझा। फाउंडेशन के संचालक पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने बताया कि सर्वेक्षण में संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा अलग होने के बावजूद ये बहुएं करीब डेढ़ लाख परिवारों का घर बसाये हुये हैं। ये परदेसी बहुएं अपमान नहीं सम्मान की हकदार हैं और इसके लिये उन्होंने अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इन शादियों का एक नया पहलू है कि इनमें से ज्यादातर विवाह अंतरजातीय है। दूसरे प्रदेशों से दलित लड़कियों के विवाह अगड़ी जातियों में हो रही हैं।
 
हालांकि ऐसी शदियां जाति प्रथा को तोड़ने में कारगर साबित हुई हैं।  जागलान ने बताया कि कई बार दूसरे प्रदेशों से बहुएं लाने के फेर में लोग धोखे का शिकार हो जाते है। शादी के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूल कर उन्हें ठग लिया जाता है। इसके अलावा उन्हें पुलिस और अदालतों में मामलों तक का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि देश में कहीं भी होने वाली शादी का पंजीकरण होना चाहिए तथा इसे आधार कार्ड से जोड़ा जाए ताकि कोई भी धोखे का शिकार न हो सके। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन देश में पहली बार गुरूग्राम के खरकड़ीी गांव में विवाह पंजीकरण शिविर आयोजित करने जा रही है।
 
सरकार भी इस तरह के पंजीकरण के लिये सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दे तथा ऐसी पंचायत या संस्था को फाउंडेशन सम्मानित करेगा। उल्लेखनीय है कि जागलान ने हरियाणा में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में अविवाहित पुरूष संगठन बनाकर बहु दो-वोट लो नामक अभियान शुरू किया था जिसका मकÞसद था कि उम्मीदवार समझ पाएं कि प्रदेश में बिगड़े लिंगानुपात के कारण यहॉ के अविवाहित युवा अपनी जमीनें बेच कर दूसरे प्रदेशों से बहुएं ला रहे हैं। यह मुद्दा देश ही नहीं विदेशों में भी काफी चर्चित हुआ था। इसके अलावा जींद जिले के ही कुंवारे लड़कों ने वर्ष 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान कुंवारे लड़कों की यूनियन बनाई थी जो एक चुनावी मुद्दा भी बन गया।