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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए प्रलय मिसाइल रेजिमेंट को दी मंजूरी

Posted at: Sep 18 2023 5:30PM
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रक्षा मंत्रालय ने प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की एक रेजिमेंट के अधिग्रहण के लिए मंजूरी दे दी है। इन्हें नियंत्रण रेखा पर तैनात किया जाएगा। रक्षा अधिकारियों ने टीवी9 को बताया कि सेना की सैन्य क्षमताओं में अधिक मारक क्षमता जोड़ने का निर्णय रक्षा अधिग्रहण परिषद की हालिया बैठक के दौरान लिया गया था। यह सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

चीन और पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय की तरफ से बैलेस्टिक मिसाइल प्रलय को खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। ‘प्रलय’ सेना की सतह से सतह पर मार करने वाली सबसे लंबी दूरी की मिसाइल होगी। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ भारत की रॉकेट फोर्स का हिस्सा बनेगी।

इन मिसाइलों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने सेना की सैन्य क्षमताओं में और अधिक मारक क्षमता जोड़ने का निर्णय लिया है। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की हालिया बैठक में यह फैसला लिया गया है।

प्रलय सेना की लिस्ट में सतह से सतह पर मार करने वाली सबसे लंबी दूरी की मिसाइल होगी। प्रलय, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ, भारत की योजनाबद्ध रॉकेट फोर्स का आधार बनेगी। प्रलय मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है।

‘प्रलय’ बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर तक है।

यह लगभग 350 किलोग्राम से 700 किलोग्राम तक के पारंपरिक हथियार ले जाने में सक्षम है। यह इसे घातक मारक क्षमता प्रदान करता है।

यह एक हाई एक्सप्लोसिव पूर्वनिर्मित फ्रेगमेंटेशन वारहेड, पेनेट्रेशन-कम-ब्लास्ट (पीसीबी) और रनवे डिनायल पेनेट्रेशन सबम्युनिशन (RDPS) भी ले जा सकता है।

‘प्रलय’ को सेमि-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल के रूप में चिह्नित किया गया है। इसमें इंटरसेप्टर मिसाइलों को विफल करने के लिए डिजाइन की गई एडवांस क्षमताएं हैं।

यह एक निश्चित दूरी तय करने के बाद उड़ान के बीच में अपने ट्रैजिक्टरी को बदलने की क्षमता प्रदर्शित करता है।

मिसाइल एक सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर से संचालित होती है। इसकी गाइडेंस सिस्टम में अत्याधुनिक नेविगेशन और एकीकृत एवियोनिक्स सहित अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है।

इसकी तुलना चीन की डोंग फेंग 12 और रूसी इस्कंदर मिसाइल से की जा सकती है। रूसी मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में किया गया है।

इस मिसाइल सिस्टम का विकास 2015 के आसपास शुरू हुआ था। इसे दिवंगत जनरल बिपिन रावत ने सेना प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण रूप से संचालित किया था।